Tag: शरीर की तमाम ज्ञानेंद्रियां और कर्मेंद्रियां सुस्त पड़ने लगती हैं। बोलना भी एक कर्म है जिसके लिए काफी ऊर्जा की ज़रूरत होती है। जब आत्मा शरीर के अलग-अलग केंद्रों से सिमटकर हृदय या सिर की तरफ बढ़ने लगती ह